कुंडली में त्रिकोण भावो से फलित कैसे करते है?


  • प्रथम त्रिकोण धर्म त्रिकोण - लग्न ,पंचम,नवम ये तीन भाव धर्म त्रिकोण है ये सभी त्रिकोण में मुख्य है बिना धर्म के जीवन ही नहीं है धर्म से ही सम्पूर्ण जगत है।।

  • दूसरा धर्म अर्थ त्रिकोण है अर्थ त्रिकोण - द्वितीय , षष्ठम ,दशम ये तीनों भाव अर्थ त्रिकोण है जब संसार में आते हैं तो मुझे अर्थ की आवश्यकता होती हैं बिना अर्थ के हम गृहस्थ धर्म का पालन अच्छे से नहीं कर सकते हैं| !!

  • तीसरा त्रिकोण काम त्रिकोण है तृतीय, सप्तम , एकादश ये तीन भाव काम त्रिकोण है काम का एक अर्थ भोग भी कहा जाता है व्यक्ति गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है और सुख भोगता है।

अन्तिम व चतुर्थ त्रिकोण मोक्ष त्रिकोण कहते है व्यक्ति सभी आश्रमों का पालन करने के बाद स्वयं अपने मोक्ष के लिए प्रयत्न करना चाहिए संसार में मानव के ये ही चार पुरुषार्थ कहे है इन चारो पुरुषार्थ करना ही मनुष्य का धर्म है|

अब हम प्रत्येक त्रिकोण पर चर्चा करते हैं।

  • धर्म त्रिकोण में शुभ ग्रह का होना ,शुभ ग्रहों की दृष्टि होना ,तीनों त्रिकोण के स्वामी केंद्र या त्रिकोण में होना अथवा शुभ ग्रहों से युति होना ,अच्छे भाव में होने से जातक धार्मिक , विनम्र व ज्ञानी अच्छे आचरणों वाला होगा |

  • अर्थ त्रिकोण सूर्य व मंगल बलवान होकर बैठे हो या अर्थ त्रिकोण के स्वामी केंद्र या त्रिकोण में हो शुभ ग्रहों से दृष्ट हों तो जातक के पास अच्छा धन होता है और वह राज्य का भी सुख भोगता है।

  • काम त्रिकोण में शुभ ग्रह शुक्र ,चंद्र का होना या शुभ ग्रहों से दृष्ट हो अथवा केंद्र या त्रिकोण में हो तो ये गृहस्थ जीवन सुखमय व्यतीत करते हैं

  • मोक्ष त्रिकोण में वैराग्य ग्रहों का होना अच्छा माना जाता है हैधर्म त्रिकोण में अग्नि तत्व राशि शुभ व बलवान मानी जाती है।

अग्नि तत्व राशि 1/5/9है। ये क्षत्रिय राशि भी कहते है

अर्थ त्रिकोण में भूमि तत्व राशि शुभ व बलवान होती है भूमि राशि 2/6/10 इनको वैश्य राशि भी कहते हैं।

काम त्रिकोण में वायु तत्व राशि शुभ है 3/7/11। इनको शूद्र राशि भी कहते है।

मोक्ष त्रिकोण में जल राशि शुभ होती है 4/8/12 इनको ब्राह्मण राशि भी कहते हैंइस तरह चार त्रिकोण होते हैं इनका विश्लेषण केसे करना चाहिए मानलो कि काम त्रिकोण में मोक्ष त्रिकोण ग्रहों का प्रभाव हो जाए तो व्यक्ति के अंदर काम वासना काम रहेगी यदि मोक्ष त्रिकोण में काम त्रिकोण के ग्रहों का प्रभाव हो तो व्यक्ति के अंदर बुढ़ापे में भी काम वासना अधिक होगी वह भोग विलास्ता का त्याग नहीं कर सकता है ऐसे ही सभी त्रिकोण का विचार कर सकते हो जैसे धर्म त्रिकोण के ग्रहों का प्रभाव अर्थ त्रिकोण में हो तो व्यक्ति धर्म कार्य में अधिक खर्च करेगा वह सदैव समाज की सेवा में धर्म कार्यों में अधिक खर्च करेगा।

लेखक :- श्री गिरीश राजोरिया जी

जिला भिंड, मध्य प्रदेश

Mob.7509930140

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