कामुकता और ज्योतिष

मेरे जीवन साथी और मेरी काम इच्छाएं अलग अलग हैं मुझे क्या करना चाहिए ?

एक सर्वे के अनुसार 20% तलाक का कारण पति पत्नी में काम इच्छाओ का अलग होना है| यह एक ऐसा विषय है जिस पर चर्चा करना समाज में अच्छा नहीं माना जाता परन्तु एक सभ्य और शिक्षित समाज में जीवन से जुड़े सभी पहलुओ पर विचार करना आवश्यक है|

भारत में भी अधिकतर देशो की तरह पुरुष प्रधान समाज रहा है, परन्तु पिछले दो दशको से विशेषतः शहरी क्षेत्रो में महिलाएं आगे आ रही है| अब महिलाएं भी खुल कर अपनी मांग समाज के आगे रखती है| आज से तीस वर्ष पहले भारत में कोई महिला Sexual incompatibility के कारण तलाक लेती थी, तो उसे समाज की निंदा का पात्र बनना पड़ता था| आज के आधुनिक युग में इस विषय पर खुल कर बात होनी आवश्यक है|

अब पछताय क्या होत जब चिड़िया चुग गयी खेत

जब आप अपने लिए जीवन साथी चुनते है तो आप उसकी शिक्षा, परिवार, सुन्दरता और आर्थिक स्थिति को देख और परख सकते है परन्तु काम इच्छाएं बहुत ही निजी पहलु है जिसका पता अधिकतर शादी के बाद ही चलता है | तब तक बहुत देर हो चुकी होती है|

ज्योतिष – निजी जीवन देखने का दरवाजा

ज्योतिष एक ऐसा शास्त्र है जो आपको व्यक्तिगत जानकारी दे सकता है| यदि ज्योतिषी अनुभवी और शिक्षित हो तो वह आपको ऐसी जानकारी दे सकता है जो शायद व्यक्ति को स्वयं भी ना पता हो | आइये अब देखते हम कैसे कुंडली देखकर व्यक्ति की काम उत्तेजना देख सकते हैं :-

काम सम्बन्ध और द्वादश भाव

कुंडली में 12वां भाव शैया सुख को दर्शाता है| पति पत्नी के बीच मैथुन सम्बन्ध को द्वादश भाव दर्शाता है | भिन्न भिन्न ग्रहों का द्वादश भाव में होने से निम्नलिखित परिणाम होता है :

  • सूर्य – ज्योतिष शास्त्र अनुसार सूर्य अलगाव वादी ग्रह है| यदि द्वादश भाव में सूर्य हो तो पति पत्नी में रात के समय टकराव की स्थिति बनती है| सम्बन्ध स्थापित करते समय दोनों साथियों में से एक मालिक की तरह दुसरे को हुक्म देता है| मैथुन क्रिया महीने में 2-3 बार ही होती है|

  • उपाय – शयन कक्ष में अहंकार की बातें नहीं करें|

  • चन्द्र – चन्द्र मन का कारक है| यदि द्वादश भाव में है तो व्यक्ति की बहुत सी कामुक इच्छाएं होती है| अत्यधिक मैथुन की सोच के कारण व्यक्ति की इन्द्रियाँ क्षीण होती है| साथी और आप में मधुर सम्बन्ध होते है| सप्ताह में 2 या इससे अधिक बार मैथुन की संभावना होती है|

  • मंगल – ज्योतिष अनुसार मंगल ऊर्जा का प्रतीक है| मैथुन क्रिया में उग्रता रहती है| आव़ाज अधिक करते है| मैथुन क्रिया में अलग अलग आसन और तरीको को इस्तेमाल करने में पीछे नही हटते है|ऊर्जा अधिक होती है, स्नेह कम होता है| इस भाव में मंगल हो तो व्यक्ति मांगलिक भी कहलाता है|

  • बुध – बुध नपुंसक ग्रह है| बुध द्वादश में हो तो व्यक्ति सम्बन्ध के समय हंसी मजाक और माहौल को हल्का रखता है|

नाम बड़े और दर्शन छोटे

पूरे दिन कामुक बातें कर सकता है परन्तु सम्बन्ध के समय शीघ्रता रहती है| आप कह सकते है की यदि बुध द्वादश में हो तो

..........शेष भाग अगले

सप्ताह

(*इन नियमो को सीधे कुंडली पर नहीं लगायें| द्वादश में स्थित राशि, लग्न पर ग्रहों की दृष्टि उपरोक्त नियमो को प्रभावित कर सकता है|)

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