Please reload

Recent Posts

Malmas 2020 | Adhik Maas | Purushottam Maas me kya karein?

September 4, 2020

1/10
Please reload

Featured Posts

भारतीय संस्कृति के अनुसार

 

माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः |

 

वो माता पिता जो संतान को विद्यावान बनाने का प्रयास नही करते वह बालक के शत्रु है |

 

आधुनिक युग में शिक्षा का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है। शिक्षा के अभाव में कुछ भी नही है। यह बात सही है परंतु फिर भी कई बार देखने में आता है कि जातक बहुत मेहनत करने पर भी अच्छा परिणाम प्राप्त नही कर पाता है और कई बार कम मेहनत करने पर भी बहुत अच्छा परिणाम प्राप्त कर लेता है । कई बार विद्यार्थी पढ़ने में बहुत होशियार होता है लेकिन उसे बाहर का अच्छा वातावरण प्राप्त नही हो पाता जिस कारण वह पढ़ाई में ज्यादा अच्छे परिणाम प्राप्त नही कर पाता है |

        

ज्योतिष के चश्मे से

पढ़ाई के साथ साथ ग्रहों से मिलने वाली सहायता लेने पर विद्यार्थी कई बार बेहतर प्रदर्शन करतें है ।प्रस्तुत लेख में हम अध्ययन में रुकावट पैदा करने वाले ग्रहों के विषय में जानने का प्रयास करेंगे।

 

जैसा कि ज्योतिषियों का मानना है कि

द्वितीय भाव                     -                       प्रारंभिक शिक्षा के विषय में बताता है अर्थात पांचवी कक्षा तक

चतुर्थ भाव                      -                       माध्यमिक शिक्षा अर्थात बारहवीं कक्षा तक

पंचम भाव                      -                       स्नातक शिक्षा अर्थात graduation level

नवम भाव                       -                       स्नाकोत्तर अर्थात post-graduation level

तथा

इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए  research के लिए हम अष्टम भाव देखते हैं।

जिस वातावरण में विद्यार्थी पढ़ता है वह चतुर्थ भाव से  देखा जाता है।

बुद्धि के लिए हम पंचम भाव और पंचमेश को देखते हैं ।

 

अब हम इसे कैसे देखेंगे ?

 

नियम 1

 

पंचम से बुद्धि का विचार

सर्वप्रथम हम जातक की बुद्धि देखेंगे क्या वो बुद्धिमान है या नही ।तो इसके लिए पंचमभाव और पंचमेश से निर्णय करेंगे। पंचमभाव यदि शुभ प्रभावों में है तो जातक की बुद्धि अच्छी होगी । पंचमेश यदि त्रिकोण में या केंद्र स्थान में में हो तो यह शुभ संकेत है लेकिन यदि वह दु:स्थान में 6,8,12में है तो इसका तात्पर्य है कि उसकी बुद्धि थोड़ा कम कार्य कर पाती है अर्थात कही न कही वह मानसिक रूप से कमजोर है या ऐसे कहें कि उसे समझने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है ।

 

नियम 2

 

कारको का विचार

इसके साथ साथ हम उसमें कारक भी देखतें हैं जैसे ज्ञान का कारक गुरु है उसकी क्या स्थिति है  क्या वो ज्ञान का कारक होकर शुभ प्रभाव में है जातक को ज्ञान होगा या नही।

 बुद्धि का कारक बुध उसकी क्या स्थिति है उसका संबंध अच्छे भाव से है या नही सुबह प्रभाव में है या अशुभ प्रभाव में ।बुध की स्थिति अच्छी नही होगी तो बुद्धि साथ नही देगी जिसके कारण जातक को अधिक मेहनत करके कार्य करना होगा ।

 

नियम 3

 

शिक्षा खंड और विद्या भाव

इसके बाद हम देखते हैं कि द्वितीय भाव और द्वितीयेश की क्या स्थिति है वो किस प्रभाव  में है यदि द्वितीय भाव अच्छा है तो जातक या जातिका की प्रारंभिक शिक्षा बहुत ही अच्छी होती है यदि वह अशुभ प्रभाव में है तो उसकी आरंभिक शिक्षा में परेशानी होगी। द्वितीयेश 6,8,12 में है नीच का है अस्त है पाप कर्तरी में है आदि आदि ये विचार भी इस पर आवश्यक है |

फिर चतुर्थ भाव चतुर्थेश पर विचार करेंगे एवं चतुर्थ भाव यदि शुभ प्रभाव  में है तो ऐसे जातकों की माध्यमिक शिक्षा अच्छी होगी यदि वो अशुभ प्रभाव में है तो माध्यमिक शिक्षा उतनी अच्छी नही होगी जितनी प्रारंभिक शिक्षा थी । इसी प्रकार हम  graduation level के लिए भी देख सकते है पंचम भाव और पंचमेश को देखेंगे । और Post-graduation level के लिए नवम भाव और नवमेश की स्थिति देखेंगें वह जैसे जैसे प्रभाव में है शुभ में या अशुभ में उसी के अनुसार फल की प्राप्ति होगी।

 

नियम 4

 

दशा गोचर का फल

कई बार विद्यार्थी पहले बहुत अच्छा प्रदर्शन करते है बाद में वो उतना अच्छा नही कर पाते या पहले अच्छा नही कर पाते बाद में बहुत अच्छा करते है या पढ़ते पढ़ते बीच में पढ़ाई छोड़ देना और कई बार ऐसा भी होता है कि पढ़ाई बीच में छोड़कर दुबारा शुरू कर देना अर्थात पढ़ाई में रुकावट ।

           इन सबके लिए हमे देखना होता है कि इन भावो पर कोई बुरा प्रभाव तो नही है यदि इन भावों पर राहु केतु आदि का या लग्नानुसार अशुभ भावो के स्वामियों के प्रभाव हो तो ऐसे जातकों की पढ़ाई में व्यवधान अवश्य आता है ।

ग्रहो का प्रभाव गोचर में उनकी स्थिति और दशा और दशानाथ का इसमें विशेष प्रभाव होता है । यदि जन्मकुंडली में ग्रह अच्छे न हो परन्तु  दशा अच्छी हो तो हम योग्यता से थोडा बेहतर परिणाम दे पाते है | यदि दशा भी अच्छी न हो और जन्म कुंडली में  ग्रह भी अच्छे न हो तो विशेष प्रभाव पड़ता है जैसे कि कहते भी है

 

एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा

        

राहु जिस  भावमें बैठता हैं या जिस भाव को दृष्टि देता है उससे संबंधित शिक्षा में रुकावट अवश्य देता है चाहे वह कारण अनुतीर्ण  होना हो आर्थिक परेशानी हो पारिवारिक समस्या हो या विद्यार्थी का खुद ही पढ़ाई से मन उचाट होना हो जैसे कि इसे हम एक उदाहरण की सहायता से समझेंगें।

 

उदाहरण

जन्म दिनांक :8-8-1982

समय:-9:15 प्रातः

स्थान:-दिल्ली

 

 

 

 

 

बुद्धि निर्णय पंचम से

प्रस्तुत कुंडली में पंचमेश शनि है जो कि त्रिकोण भाव में बैठा है जो केंद्र स्थान भी है इसे विष्णु लक्ष्मी  स्थान भी कहा जाता है ।

यह एक अच्छा योग है इस जातिका की बुद्धि अच्छी है समझ  जल्दी आता है| 

 

कारको का विचार

लग्नेश क्योंकि बुध है और वो भी बारहवें भाव में है तो ये स्मरण शक्ति का ह्रास दिखता है इसकी स्मरणशक्ति कमजोर है परंतु बुद्धि अच्छी है क्योंकि गुरु भी इसका द्वितीय भाव में बैठा है

 

शिक्षा खंड और विद्या भाव

द्वितीय भाव

द्वितीयेश शुक्र  है जो राहु के साथ बैठा है जो अपने से नवम भाव में है यह अच्छा है नवमेश भी है परंतु राहु के साथ बैठा है  तो थोड़ी परेशानी देगा पढ़ाई अच्छी थी परंतु कई विद्यालय बदलने पड़े इसकी प्रारंभिक शिक्षा बहुत अच्छी थी।

चतुर्थ भाव:-

राहु का प्रभाव चतुर्थ भाव को राहु देख रहा है केतु वही बैठा है अतः यहाँ यह रुकावट दिखा रहा है चतुर्थेश  भी शत्रु राशि में बैठा है अतः इस जातिका को यहाँ भी थोड़ी परेशानी आएगी पढ़ाई में रुकावट आएगी

दशा और गोचर विचार

इसके साथ ही 1998 में जब शनि नीच का था तो इस जातिका को शनि की महादशा भी लगी हुई थी अतः उस समय इसकी पढ़ाई में व्यवधान आया लगभग 2 वर्ष तक इसने पढ़ाई बिल्कुल छोड़ दी थी उसके बाद फिर से पढ़ाई शुरू की यह रुकावट बारहवीं कक्षा में आई थी ।

फिर  graduation की और उसके बाद  higher education (post graduation) जहाँ नवमेश दशम भाव में बैठा है राहु के साथ लेकिन यह इसकी शिक्षा अच्छी रही परिणाम बेहतर आये बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला कई विषय पढ़े परंतु रिसर्च में परेशानी आयी अब तक आ रही है ये रिसर्च करना चाहती है लेकिन अवसर अनुकूल नही मिल रहे है अभी भी पढ़ाई जारी है |दिसंबर 2016 से अब अवसर प्राप्त हुआ है इसे फिर से अपनी इच्छानुसार पढ़ाई करने का ।

              इस प्रकार हम देखते है कि राहु शनि केतु अशुभ ग्रह पढ़ाई में बहुत परेशानियां उत्पन्न करतें है यह शनि राजयोग बना रहा है पंचमेश है परंतु फिर भी दशा  और गोचर का संयोग मिलने पर इसने पढ़ाई में रुकावट पैदा की ।

कुछ अपने अनुभव  आपसे बाँटने का प्रयास किया । त्रुटि के लिए क्षमाप्रार्थी  हुँ ।

                      

 

लेखिका का परिचय 

प्रवचन प्रभविका मधुर व्याख्यानि जैन साध्वी श्री भावना जी महाराज (डबल.एम.ए.)

गुरानी:-उग्र तपस्विनी संकट मोचीनी जैन साध्वी श्री चंदना (बिल्लो)जी महाराज 

इन्होंने जैन धर्म में 4 फरवरी 1996 को दीक्षा ग्रहण की

 

ज्योतिष सम्बंधित ऐसे और लेख के लिए  JOIN करना न भूलें | 

 

 

 

Share on Facebook
Share on Twitter
Please reload

Follow Us